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Earthquake tremors in Haryana: हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, चडीगढ़ समेत उत्तर भारत में भूकंप के झटके

 
Earthquake tremors in Haryana: हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, चडीगढ़ समेत उत्तर भारत में भूकंप के झटके

Earthquake tremors felt in Delhi and parts of north India

हरियाणा, पंजाब, चडीगढ़ में भूकंप के झटके महसूस किये गए हैं। आज दोपहर एक बजकर 36 मिनट पर करीब एक मिनट तक अलग अलग बार में भूकंप के झटके मसहूस किये गए हैं।

बिग ब्रेकिंग चंडीगढ़ एनसीआर दिल्ली में भी भूकंप के झटके, 10 सेकेंड तक महसूस किए गए झटके।

उत्तर भारत में महसूस किए गए 5.2 तीव्रता वाले भूकंप के झटके

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, बुधवार दोपहर New Delhi, India के निकट रिक्टर पैमाने पर 5.2 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए.

कैसे आता है भूकंप?

सामान्यत: समझें कि ऊपर से शांत दिखने वाली धरती के अंदर हमेशा उथल-पुथल मची रहती है. धरती के अंदर मौजूद प्लेटें आपस में टकराती रहती हैं जिसके चलते हर साल भूकंप आते हैं. भूकंप का साइंस समझने से पहले हमें धरती के नीचे मौजूद प्लेटों की संरचना को समझना होगा. भू-विज्ञान के जानकार और एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में शिक्षक डाॅ गुंजन राय बताती हैं कि हमारी धरती 12 टैक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है. इन प्लेटों के टकराने पर जो ऊर्जा निकलती है, उसे भूकंप कहा जाता है.

डॉ राय के अनुसार, धरती के नीचे मौजूद ये प्लेटें बेहद धीमी रफ्तार से घूमती रहती हैं. हर साल ये प्लेटें अपनी जगह से 4-5 मिमी खिसक जाती हैं. इस दौरान कोई प्लेट किसी से दूर हो जाती है तो कोई किसी के नीचे से खिसक जाती है. इसी दौरान प्लेटों के टकराने से भूकंप आता है.

भूकंप का केंद्र क्या होता है?

धरती की सतह के नीचे जहां पर चट्टानें आपस में टकराती हैंं या टूटती हैं, उस जगह को भूकंप का केंद्र या फोकस कहा जाता है. इसे हाइपोसेंटर भी कहा जाता है. इस केंद्र से ही भूकंप की ऊर्जा तरंगों के रूप में बतौर कंपन फैलती है. ये कंपन उसी तरह होता है, जैसे शांत तालाब में पत्थर फेंकने से तरंगें फैलती हैं.

साइंस की भाषा में समझें तो धरती के केंद्र को भूकंप के केंद्र से जोड़ने वाली रेखा जिस स्थान पर धरती की सतह को काटती है, उसे भूकंप का अभिकेंद्र यानी एपिक सेंटर कहा जाता है. नियमों के मुताबिक धरती की सतह पर यह स्थान भूकंप के केंद्र से सबसे नजदीक होता है.

क्यों टूट जाती हैं चट्टानें?

धरती कुल सात भूखंडों से मिलकर बनी है. भारतीय-आस्ट्रेलियाई भूखंड, उत्तर अमेरिकी भूखंड, प्रशांत महासागरीय भूखंड, दक्षिण अमेरिकी भूखंड, अफ्रीकी भूखंड, अन्टार्कटिक भूखंड, यूरेशियाई भूखंड है. धरती के नीचे चट्टानें दबाव की स्थिति में होती हैं और जब दबाव एक सीमा से ज्यादा हो जाता है तो चट्टानें अचानक से टूट जाती हैं. ऐसा होने पर वर्षों से मौजूद ऊर्जा मुक्त हो जाती है और चट्टानें किसी कमजोर सतह की तरह टूट जाती हैं.

कैसे मचती है तबाही?

धरती के नीचे स्थित चट्टानें आम तौर पर स्थिर लगती है लेकिन ऐसा नहीं है. धरती की सतह ना तो स्थिर है और न ही अखंड, बल्कि यह महाद्वीप के साइज के विशाल प्लेटों से मिलकर बनी है. इन चट्टानों को धरती की सतह पर ठोस परत के रूप में समझा जा सकता है और इनका विस्तार महाद्वीपों के साथ साथ समुद्र तक होता है. महाद्वीप के नीचे मौजूद चट्टानें हल्की होती हैं, वहीं समुद्री भूखंड भारी चट्टानों से मिलकर बना होता है. ये चट्टानें भूकंप से टूटती हैं और बाहर तबाही का कारण बनती हैं.